चंडीगढ़(गुरीत सिंह):पंजाब कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में हाल ही में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया, जिसे वे ‘प्रक्रियागत छल’ और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का मामला बता रहे हैं।
अरोड़ा का दावा है कि उन्हें बेवजह ‘गंभीर अपराधी’ ठहराकर सबूत मिटाने या भागने का लेबल लगा दिया गया। वरिष्ठ वकील पुनीत बाली ने बेंच को बताया कि मामला 2023-24 के वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है, जब अरोड़ा मंत्री नहीं बने थे। सभी दस्तावेज जांच एजेंसियों के पास हैं, और उन्होंने राजनीति में आने के बाद कंपनी से किनारा कर लिया।
मुख्य हमला गिरफ्तारी के समय पर है। सुबह 7 बजे ईडी अधिकारी घर पहुंचे, घेराबंदी की, लेकिन दोपहर में बयान के बाद ही औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज हुई। वकील ने इसे ‘पहले से तैयार कागजात’ वाला खेल बताया। पोटा लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) और सीआरपीसी के नियम तोड़े गए- गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट बताने और मजिस्ट्रेट के सामने पेशी में ढिलाई बरती गई।
बाली ने अनुच्छेद 21 का हवाला देकर कहा कि संविधान की रक्षा को ‘कागजी औपचारिकता’ से कमजोर नहीं किया जा सकता। गिरफ्तारी के आधार इतने जल्दी कैसे तैयार हुए? जीएसटी रिफंड और एक्सपोर्ट ट्रांजेक्शन पर सवाल उठे- जीएसटी विभाग ने कुछ दावे खारिज किए, कस्टम रिकॉर्ड एक्सपोर्ट दिखाते हैं, छोटी असंगतियां हैं। बैंक रिकॉर्ड आरटीजीएस-चेक से साफ हैं, बिना फैसले के अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।
ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने बचाव के कुछ दावों को गलत बताया। सुनवाई शुक्रवार को आगे होगी। अरोड़ा का साथ दे रहे वकील टीम में विभव जैन, वीरन सिब्बल, जसमन सिंह गिल भी हैं।
