वाटरशेड विकास को नई रफ्तार, दो लाख एकड़ भूमि का लक्ष्य तय करने के निर्देश

चण्डीगढ(बलविंदर सिंह):हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वाटरशेड डिवलेपमेंट कम्पोनेंट के तहत प्रदेश में दो लाख एकड़ से अधिक भूमि का लक्ष्य रखकर प्रस्ताव तैयार किए जाए और ज्यादा से ज्यादा खण्डों को शामिल किया जाए

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी वाटरशेड डिवेलेपमेंट कम्पोनेंट प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा किसानों को गन्ने की फसल की बिजाई टपका सिंचाई प्रणाली से अपनाने के लिए जागरूक किया जाए। इसके अलावा मोरनी, शिवालिक क्षेत्र में चैक डेम, जल सरंक्षण एवं पेयजल गतिविधियों के लिए स्थलों का चिन्हित किया जाए ताकि बरसाती पानी को एकत्र कर पेयजल योजनाओं के लिए सदुपयोग किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने एक्सीलरेटिड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम, हर खेत को पानी, पर ड्रोप मोर ड्रोप एवं वाटरशेड डिवेलेपमेंट कम्पोनेंट, सघन वाटरशेड डिवेलेपमेंट मैनेजमेंट प्रोग्राम, भूमि एवं जल संरक्षण गतिविधियों एवं अटल भूजल योजना की विस्तार से समीक्षा की और अधिकारियों को सिंचाई के साथ भूजल रिचार्ज एवं बरसाती जल के बचाव एवं उपयोग को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

9 खण्डों के 74 गांवों में माईक्रो वाटरशेड कार्यों पर 40 करोड़ खर्च

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वाटरशेड डिवेलेपमेंट कम्पोेनेंट के तहत प्रदेश के भिवानी, चरखी दादरी, महेन्द्रगढ, गुरूग्राम, यमुना नगर सहित 5 जिलों के बहल, लोहारू, बाढड़ा, नांगल चौधरी, महेन्द्रगढ, सोहना, पटौदी, छछरौली तथा सढौरा सहित 9 खण्डों के 74 गांवों में माईक्रो वाटरशेड कार्यों पर लगभग 40 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जल सरंक्षण गतिविधियों में रेन वाटर हारवेस्टिंग कुण्ड, वाटर टंकी, रिचार्ज बोर, रिसाव तालाब, सॉकेट पिटस, गांवों के तालाबों का नवीनीकरण, तालाब के लिए रैम्प निर्माण, छतों के बरसाती पानी का संरक्षण, भूमिगत पाईप लाईन, ओपन वाटर चैनल, वाटर स्टोरेज टैंक, मिट्टी के बांध से गाद निकालना, नए सामुदायिक तालाब, वेस्ट वाटर चैनल के लिए नए निर्माण तथा जल संचालन प्रणाली के 531 कार्य किए गए। इनमें भिवानी जिले में 229, चरखी दादरी में 82, गुरूग्राम में 107, महेन्द्रगढ में 77, तथा यमुना नगर के 36 कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में संचालित जल संरक्षण गतिविधियों के तहत 421.79 एकड़ भूमि पर 70 जलाशय बनाए गए। इसके अलावा वाटर सेक्यूर हरियाणा प्रोग्राम के तहत 131 जलाशय बनाए जाने प्रस्तावित हैं। इन जल सरंक्षण कार्यों से प्रदेश के किसानों की लगभग 77500 एकड़ भूमि पर रिचार्ज एवं सिंचाई की सुविधाएं सुलभ हुई है।

अटल भूजल से 40405 किसानों ने अपनाई टपका सिंचाई प्रणाली

उन्होंने बताया कि बबैन, शाहाबाद, थानेसर, पिपली, इस्माईलाबाद, गुहला, सिवन, रतिया एवं सिरसा खण्डों में 35 करोड़ रुपए की लागत से एक हजार बोरवेल लगाए गए। इसके अलावा सिरसा, कुरूक्षेत्र, कैथल, हिसार, फतेहाबाद में 847 बोलवेल और लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा चैक डेम, रिचार्ज वेल, डैम एवं बांध, सेफ्टी वाल, वाटर बॉडीज का नवीनीकरण, ड्रोप स्ट्रक्चर जैसे कार्य किए गए है। अटल भूजल योजना के तहत 40405 किसानों की 77175 हैक्टेयर भूमि पर टपका सिंचाई प्रणाली अपनाई गई।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेन्द्र कुमार, मुख्यमंत्री के उपप्रधान सचिव डा. यशपाल, निदेशक विकास एवं पंचायत सुशील सारवान, कृषि सिंचाई योजना के सीईओ महावीर कौशिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

By Balwinder Singh

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