जालंधर (गुरप्रीत सिंह): जालंधर में एक आम सफर उस समय एक भयानक हादसे में बदल गया जब पठानकोट बाईपास फ्लाईओवर पर चलती हुई एक नई स्विफ्ट डिजायर (Swift Dzire) कार में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में गाड़ी पूरी तरह से जलकर खाक हो गई, हालांकि आग की लपटें तेज होने से पहले ही कार में सवार लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे।
बताया जा रहा है कि एक दंपत्ति स्थानीय अस्पताल में भर्ती अपने एक बीमार परिजन से मिलने जा रहे थे, तभी अचानक कार से धुआं निकलने लगा। खतरे को भांपते हुए, वे तुरंत कार छोड़कर बाहर निकल आए, और इसके कुछ ही पलों बाद कार आग के गोले में तब्दील हो गई।
चश्मदीदों ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि गाड़ी को बचाने का कोई मौका नहीं मिला। आसमान में काले धुएं का गुबार उठने लगा और कार का अंदरूनी हिस्सा, जिसमें सीटें, स्टीयरिंग व्हील और डैशबोर्ड शामिल हैं, जलकर राख हो गया। कई राहगीरों और स्थानीय निवासियों ने छोटे अग्निशामक यंत्रों (fire extinguishers) और पानी की मदद से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि उस पर काबू पाना नामुमकिन था।
सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया। हालांकि, तब तक गाड़ी पूरी तरह से जल चुकी थी। बाद में दंपत्ति को एहतियात के तौर पर डॉक्टरी जांच के लिए पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि शॉर्ट सर्किट की वजह से कार में आग लगी होगी, हालांकि सही कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने फ्लाईओवर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने को लेकर प्रशासन की आलोचना भी की। उन्होंने जल चुकी कार के आस-पास खराब रोशनी, चेतावनी बैरिकेड्स और रिफ्लेक्टिव मार्कर्स (चमकदार संकेतकों) की कमी की ओर इशारा किया और तर्क दिया कि इस लापरवाही के कारण वहां से गुजरने वाले अन्य वाहनों के साथ कोई दूसरा हादसा भी हो सकता था।
यह वाकया एक बार फिर याद दिलाता है कि वाहनों की नियमित जांच और त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली कितनी जरूरी है, खासकर व्यस्त शहरी सड़कों पर जहां तकनीकी खराबी कुछ ही पलों में जानलेवा साबित हो सकती है।
