चंडीगढ़(बलविंदर सिंह):हरियाणा सरकार अपने प्रस्तावित “साथ” (SAATH) प्रोजेक्ट के तहत कक्षा VI से XII तक के विद्यार्थियों के लिए एक व्यवस्थित स्कूल-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली शुरू करने की योजना बना रही है। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा के तनाव, चिंता (एंजाइटी), अवसाद (डिप्रेशन), बुलिंग, सामाजिक अलगाव और अत्यधिक स्क्रीन उपयोग सहित विभिन्न मनोवैज्ञानिक समस्याओं की समय रहते पहचान करना है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इसमें स्वास्थ्य और स्कूल शिक्षा विभाग, शिक्षकों, अभिभावकों, छात्र स्वयंसेवकों, परामर्शदाताओं, नैदानिक मनोवैज्ञानिकों (क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट) और मनोचिकित्सकों (साइकियाट्रिस्ट) को शामिल करते हुए एक समन्वित तंत्र की परिकल्पना की गई है।
प्रस्तावित रूपरेखा के तहत पेशेवर सहायता प्रणाली के हिस्से के रूप में स्वास्थ्य विभाग के 122 परामर्शदाताओं को चिह्नित किया गया है। इसमें मनोविज्ञान की योग्यता वाले शिक्षकों और विशिष्ट मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भागीदारी भी शामिल है, ताकि पेशेवर मदद की आवश्यकता वाले छात्रों को समय पर सहायता मिल सके। विद्यार्थियों की अलग-अलग विकासात्मक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, कक्षा VI से VIII और कक्षा IX से XII के छात्रों के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि कक्षा VI से VIII के छात्रों के लिए ध्यान मुख्य रूप से भावनात्मक जागरूकता, आत्मविश्वास, किशोरावस्था से जुड़े बदलावों, परीक्षा की चिंता, बुलिंग, साथियों द्वारा उपेक्षा और माता-पिता के साथ बातचीत में आने वाली कठिनाइयों पर केंद्रित होगा। शिक्षकों को शुरुआती लक्षणों—जैसे लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, लोगों से दूरी बनाना, दिनचर्या के कार्यों में रुचि कम होना, एकाग्रता की कमी, शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट और स्कूल जाने में आनाकानी—की पहचान करने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा। यह कार्यक्रम अत्यधिक गेमिंग, सोशल मीडिया पर निर्भरता, अनुचित ऑनलाइन सामग्री, नींद की कमी और लंबे समय तक स्क्रीन के इस्तेमाल से उत्पन्न होने वाली चिंताओं का भी समाधान करेगा। इसके अतिरिक्त पारिवारिक विवाद, माता-पिता का दबाव, भाई-बहनों के बीच तुलना, किसी प्रियजन का खोना और हिंसा या उपेक्षा का सामना करने जैसे कारकों पर भी ध्यान दिया जाएगा जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
डॉ मिश्रा ने बताया कि कक्षा IX से XII के छात्रों के लिए कार्यक्रम में बोर्ड परीक्षा के दबाव, प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं, करियर की अनिश्चितता, विफलता के डर, साथियों के दबाव और मानसिक थकान पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही चिंता, अवसाद से जुड़े लक्षणों, शरीर की बनावट (बॉडी-इमेज) को लेकर चिंता, अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों, संबंधों में कठिनाइयों और नशीले पदार्थों के सेवन के जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या के विचारों के चेतावनी संकेतों को पहचानने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों और नामित कर्मियों को ऐसी स्थितियों की पहचान करने और उपयुक्त मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास तुरंत भेजने (रेफर करने) के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
माता-पिता और छात्र स्वयंसेवक होंगे शामिल
डॉ सुमिता मिश्रा ने आगे जानकारी दी कि अभिभावक-शिक्षक बैठकें (PTM) मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेंगी। माता-पिता को बच्चों के व्यवहार, मनःस्थिति (मूड), नींद के पैटर्न, शैक्षणिक प्रदर्शन और सामाजिक व्यवहार में आने वाले बदलावों को पहचानने के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्हें बिना कोई डर या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियां पैदा किए, बच्चों के साथ सहयोगात्मक तरीके से संवाद करने के लिए संवेदनशील बनाया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत भागीदार स्कूलों में ‘छात्र स्वास्थ्य राजदूत’ (स्टूडेंट हेल्थ एंबेसडर) बनाने का भी प्रस्ताव है। एक वरिष्ठ छात्र स्वास्थ्य राजदूत को ‘साथ समन्वयक’ (SAATH Coordinator) के रूप में नामित किया जाएगा, जो विद्यार्थियों और नामित स्कूल कर्मियों के बीच जागरूकता गतिविधियों व संचार को सुगम बनाएगा। उनकी भूमिका केवल सहपाठियों के बीच जागरूकता फैलाने और सहयोगात्मक संवाद तक सीमित रहेगी; वे कोई निदान या उपचार नहीं करेंगे।
पहचान और रेफरल के लिए पांच-स्तरीय तंत्र
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रस्तावित रूपरेखा में पांच-स्तरीय सहायता और रेफरल तंत्र की परिकल्पना की गई है, जो कक्षा के स्तर से शुरू होकर आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ मनोचिकित्सकीय देखभाल तक विस्तारित होगा। पहले स्तर पर, कक्षा शिक्षक व्यवहार या भावनात्मक बदलावों का अवलोकन करेंगे, छात्रों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बातचीत करेंगे और स्कूल-स्तरीय हस्तक्षेपों का रिकॉर्ड वर्ग-वार ‘साथ मूल्यांकन और परामर्श रजिस्टर’ में रखेंगे। दूसरे स्तर पर, छात्र स्वास्थ्य राजदूत और साथ समन्वयक सहपाठियों में जागरूकता बढ़ाएंगे और सहायता की आवश्यकता वाले छात्रों को नामित स्कूल कर्मियों तक पहुँचने में मदद करेंगे। तीसरे स्तर पर, स्वास्थ्य विभाग के परामर्शदाता और मनोविज्ञान-योग्य नामित शिक्षक अपनी पेशेवर क्षमताओं के दायरे में परामर्श, स्क्रीनिंग, मूल्यांकन और मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। चौथे स्तर पर, विशेष मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता वाले छात्रों को नामित AFLC क्लीनिकों में भेजा जाएगा, जहाँ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट उनकी ज़रूरतों का आकलन करेंगे और उचित सहायता देंगे। पांचवें स्तर पर, मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन या उपचार की आवश्यकता वाले छात्रों को मनोचिकित्सकों द्वारा जांच के लिए मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिकों में भेजा जाएगा, जिसके बाद सलाह के अनुसार उपचार और फॉलो-अप किया जाएगा। यह रेफरल व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि जिन छात्रों को पेशेवर हस्तक्षेप की आवश्यकता है, उन्हें केवल स्कूल-स्तरीय सहायता पर निर्भर न रखकर निरंतर और विशेषज्ञ देखभाल मिले।
122 परामर्शदाता और 400 शिक्षक संभालेंगे नेटवर्क
उन्होंने बताया कि हरियाणा भर में साथ (SAATH) प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 122 परामर्शदाताओं को प्रशिक्षित किया है। ये परामर्शदाता इस पहल के तहत चिह्नित 200 सरकारी स्कूलों में से प्रत्येक स्कूल के दो नामित शिक्षकों के साथ समन्वय करेंगे, जिससे लगभग 400 प्रशिक्षित शिक्षकों का एक नेटवर्क तैयार होगा। स्कूल शिक्षा विभाग प्रत्येक स्कूल में दो शिक्षकों की पहचान करके, उनका प्रशिक्षण सुनिश्चित करके और स्कूल के माहौल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता व शुरुआती पहचान को एकीकृत करके इस पहल को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सभी नामित शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, मनोवैज्ञानिक तनाव की शुरुआती पहचान, सहायक संचार और उचित रेफरल तंत्र पर संरचित प्रशिक्षण मिलेगा। इस समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य एक वर्ष के भीतर सभी 200 चिह्नित सरकारी स्कूलों के कक्षा IX से XII तक के छात्रों तक पहुँचना है। यह पहल संवेदनशील छात्रों की शुरुआती स्तर पर पहचान करने, समय पर पेशेवर सहायता उपलब्ध कराने और एक मानसिक रूप से स्वस्थ व मजबूत पीढ़ी को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
शिक्षकों को मिलेगा संरचित प्रशिक्षण
डॉ मिश्रा ने बताया कि स्कूल कर्मियों का प्रशिक्षण इस परियोजना का एक और प्रमुख घटक होगा। मानसिक स्वास्थ्य विभाग शिक्षकों और परामर्शदाताओं के लिए मानकीकृत और आयु-अनुकूल वीडियो प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करेगा, जिन्हें ECHO प्लेटफॉर्म और यूट्यूब सहित आधिकारिक डिजिटल चैनलों के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा। लेवल 1 प्रशिक्षण कक्षा VI से VIII तक को कवर करेगा और इसमें बच्चों के बुनियादी मानसिक स्वास्थ्य, विकासात्मक बदलावों, भावनात्मक कठिनाइयों, शुरुआती चेतावनी संकेतों, सहायक संचार और रेफरल प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कक्षा IX से XII को संभालने वाले शिक्षकों के लिए तय लेवल 2 प्रशिक्षण किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा के तनाव, साथियों के दबाव, नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम, जटिल व्यवहार संबंधी चिंताओं और उचित रेफरल प्रक्रियाओं को कवर करेगा। इसमें बुनियादी प्रशिक्षण का दोहराव भी शामिल होगा। प्रशिक्षण मॉड्यूल में गोपनीयता, बाल संरक्षण और संवेदनशील संचार पर जोर दिया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों का सामना कर रहे छात्रों को किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े।
हरियाणा के मानसिक स्वास्थ्य निदेशक, डॉ. ब्रह्म दीप ने कहा कि शुरुआती पहचान और समय पर हस्तक्षेप से बच्चों की मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों को गंभीर मानसिक स्थितियों में बदलने से रोका जा सकता है। साथ प्रोजेक्ट के माध्यम से उद्देश्य भावनात्मक रूप से मजबूत छात्र तैयार करना, एक सहायक स्कूल वातावरण का निर्माण करना और यह सुनिश्चित करना है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा कोई भी बच्चा बिना पहचान के या पेशेवर सहायता के बिना न छूटे। प्रस्तावित साथ प्रोजेक्ट के जरिए हरियाणा एक एकीकृत और टिकाऊ स्कूल मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जो निवारक जागरूकता, शुरुआती पहचान, परामर्श, पेशेवर मूल्यांकन और विशेष उपचार को एक साथ लाती है। यह पहल राज्य सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता को स्कूल के माहौल का एक अभिन्न हिस्सा बनाया जाए और हर छात्र की सुरक्षित व सहयोगात्मक देखभाल तक पहुँच सुनिश्चित की जाए।
