चंडीगढ़(बलविंदर सिंह): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि तप, संयम और आत्म-अनुशासन ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। असली विजय किसी दूसरे को हराने में नहीं, बल्कि अपने भीतर के क्रोध, लोभ, अहंकार और नफरत पर विजय पाने में है।
मुख्यमंत्री शनिवार को पंजाब के होशियारपुर में प्रथम पातशाह श्री गुरु नानक देव जी के बड़े साहिबजादे बाबा श्री चंद जी महाराज के 532वें प्रकाश पर्व और पूर्णमासी के पावन अवसर पर आयोजित ‘सर्वधर्म सम्मेलन’ को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में पधारे संतों और धर्माचार्यों का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग धर्मों की उपासना पद्धतियां, प्रार्थना के तरीके, वेशभूषा और भाषाएं भले ही भिन्न हो सकती हैं, लेकिन सबकी मंजिल एक ही है। मनुष्य के भीतर प्रेम जगाना, अहंकार को मिटाना, दुखी की सेवा करना और परमात्मा से जुड़ना है। यह सर्वधर्म सम्मेलन पंजाब की उस महान संस्कृति का जीवंत संदेश है जो दिलों को जोड़ती है और मानवता को सर्वोपरि रखती है।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बाबा श्री चंद जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1494 में जन्मे बाबा श्री चंद जी का जीवन वैराग्य, तप और साधना की अद्भुत मिसाल है। संतों ने कठिन दौर में धार्मिक स्थलों की सेवा-संभाल करने के साथ-साथ श्री गुरु नानक देव जी के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में अमूल्य योगदान दिया।
मुख्यमंत्री ने श्री गुरु नानक देव जी की 16वीं पीढ़ी के वंशज और कार्यक्रम के आयोजक श्रद्धेय बाबा सुखदेव सिंह बेदी जी का धन्यवाद व्यक्त किया, जिन्होंने इस पावन प्रकाश पर्व को सर्वधर्म सम्मेलन से जोड़कर सर्व-समाज को एक मंच पर लाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा और पंजाब केवल भौगोलिक रूप से ही पास नहीं हैं, बल्कि दोनों प्रदेशों की सभ्यता, संस्कृति और संतों की विरासत भी साझी है। हरियाणा की पावन धरती पर कुरुक्षेत्र, पिहोवा, कैथल, जींद, सिरसा और अंबाला जैसे अनेक स्थलों पर गुरु परंपरा और उदासी संतों की पावन स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। पंजाब की धरा पर उन्हें सदैव अपनेपन और भाईचारे का अनुभव होता है।
मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि आज नशा, हिंसा, तनाव और भटकाव युवा शक्ति को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बाबा श्री चंद जी महाराज से आत्म-अनुशासन, श्री गुरु नानक देव जी से सेवा और गुरु परंपरा से साहस सीखकर अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेल, रोजगार, उद्यम और राष्ट्र निर्माण में लगाएं।
गुरबाणी के संदेश ‘पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने धार्मिक आयोजनों को स्वच्छता, जल-संरक्षण और वृक्षारोपण से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रकाश पर्व के अवसर पर पौधा लगाना, किसी जरूरतमंद की सहायता करना और युवा को नशामुक्त बनाना ही बाबा श्री चंद जी के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी।
