शहीद सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा रुकवाई: ग्रामीणों ने नौकरी और सभी सुविधाओं की मांग को लेकर किया प्रदर्शन, बोले- 3 दिन से गांव नहीं पहुंचा कोई अफसर

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के सिरसा जिले के आर्मी जवान सुखचैन सिंह का आज शनिवार को पैतृक गांव कुत्ताबढ़ में अंतिम संस्कार होगा। पहले उनकी पार्थिव देह शुक्रवार को पठानकोट से हवाई से सिरसा पहुंचनी थी, लेकिन बारिश के कारण रात में सिरसा एयरफोर्स स्टेशन में रखवा दिया गया था।

परिवार के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 10 बजे पार्थिव देह कुत्ताबढ़ पहुंच गया, जहां कुछ समय के लिए अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए पूरा गांव एकजुट है।

बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, महिलाएं और लोग गांव के बाहरी और एंट्री पॉइंट पर तिरंगा लेकर खड़े हुए हैं। शहीद सुखचैन अमर रहे, वंदेमातरम्, भारत माता की जय के नारे गूंज रहे हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी शोक व्यक्त करते हुए शहीद सुखचैन सिंह को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा-

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जम्मू कश्मीर के राजौरी में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सिरसा के ग्राम कुत्ताबढ़ निवासी जवान सुखचैन सिंह को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया और देश के प्रति अपनी निष्ठा और साहस दिखाया।QuoteImage

शहीद सुखचैन सिंह के शोक में पूरा गांव एकजुट है। शहीद के गांव तक तिरंगा यात्रा निकालते युवा।

शहीद सुखचैन सिंह के शोक में पूरा गांव एकजुट है। शहीद के गांव तक तिरंगा यात्रा निकालते युवा।

भारत माता की जयकारे लगाते हुए बड़ी संख्या में युवा बाइकों पर शहीद सुखचैन सिंह के गांव पहुंचे।

भारत माता की जयकारे लगाते हुए बड़ी संख्या में युवा बाइकों पर शहीद सुखचैन सिंह के गांव पहुंचे।

स्कूली बच्चे और महिलाएं गांव के एंट्री साइड में तिरंगा लेकर खड़े हुए हैं।

स्कूली बच्चे और महिलाएं गांव के एंट्री साइड में तिरंगा लेकर खड़े हुए हैं।

शहीद सुखचैन सिंह के बारे में जानिए…

  • 2015 में भर्ती, राजौरी में थी वर्तमान तैनाती : सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे। अभी उनकी ड्यूटी 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट राजौरी, कश्मीर में चल रही थी। वे गुरुवार को सुबह 11 बजे जम्मू कश्मीर के राजौरी में ड्यूटी के दौरान देश के लिए शहीद हो गए। सुखचैन सिंह के परिवार में उनकी पत्नी निर्मल कौर और 5 साल का बेटा है। उनकी शादी 2020 में हुई थी।
  • दो भाई और एक बहन, पिता का हो चुका देहांत: सुखचैन जब 7 साल के थे, तभी उनके पिता बलविंद्र सिंह का देहांत हो गया था। उनकी माता का नाम अमर कौर है। शहीद सुखचैन सिंह के 2 भाई और एक बहन है। तीनों भाई-बहन शादीशुदा हैं। उनके बड़े भाई गांव में शैटरिंग का काम करते हैं। सुखचैन सिंह का परिवार और उनके बड़े भाई का परिवार पिछले काफी समय से गांव कुत्ताबढ़ में ही रह रहे हैं।
  • सरपंच ने वीडियो जारी कर दी थी जानकारी : गांव कुत्ताबढ़ के सरपंच बेअंत सिंह ने एक वीडियो जारी कर बताया था कि गुरुवार को शहीद होने के बाद परिवार को सूचना दी गई थी। उन्हें बताया गया था कि शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे तक पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंच जाएगा।
  • रात में एयरफोर्स स्टेशन में रखा गया पार्थिव शरीर : जम्मू कश्मीर के राजौरी से पार्थिव शरीर को हवाई जहाज से पठानकोट तक लाया गया। मगर आगे खराब मौसम के कारण पठानकोट से पार्थिव शरीर को एम्बुलेंस से सड़क मार्ग से सिरसा के लिए शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे रवाना किया गया। शुक्रवार रात करीब 11 बजे सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर सिरसा एयरफोर्स में रखा गया था।
By Gurpreet Singh

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