पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को पाकिस्तान के नंबर से जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। बिट्टू को व्हाट्सऐप पर एक वॉयस मैसेज भेजा गया, जिसमें कथित तौर पर उन्हें धमकाते हुए अपनी गतिविधियां सीमित रखने की चेतावनी दी गई। मैसेज में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा गया कि उनके लिए ‘किलो का डिब्बा’ तैयार है। धमकी मिलने के बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई और जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, बिट्टू को यह वॉयस मैसेज एक विदेशी नंबर से व्हाट्सऐप पर भेजा गया। मैसेज में उन्हें धमकाते हुए कहा गया कि वे अपनी ‘औकात में रहें’। इसके बाद धमकी देने वाले ने गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही। मैसेज में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी मामले को गंभीरता से ले रही हैं।
धमकी मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मैसेज भेजने वाले नंबर की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नंबर किस व्यक्ति के नाम पर है और इसका इस्तेमाल कहां से किया गया। जांच एजेंसियां वॉयस मैसेज की तकनीकी जांच भी कर सकती हैं, ताकि आरोपी की पहचान और उसकी लोकेशन से जुड़े संभावित सुराग मिल सकें।
रवनीत सिंह बिट्टू पहले भी धमकियों से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। फरवरी 2023 में भी उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से कथित धमकी भरा कॉल मिलने की खबर सामने आई थी। उस समय उन्होंने दावा किया था कि उन्हें अमृतपाल सिंह के खिलाफ बोलना बंद करने की चेतावनी दी गई थी।
वर्तमान मामले में धमकी देने वाले व्यक्ति ने व्हाट्सऐप के जरिए वॉयस मैसेज भेजा है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह मैसेज सीधे बिट्टू को भेजा गया या उनके किसी करीबी या स्टाफ के नंबर पर पहुंचा। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि धमकी के पीछे किसी संगठित गिरोह या अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं।
विदेशी नंबर से धमकी मिलने के कारण साइबर जांच भी अहम मानी जा रही है। पुलिस नंबर की तकनीकी जानकारी जुटाने के साथ-साथ व्हाट्सऐप मैसेज से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया में जुट सकती है। जांच में कॉल डिटेल, नंबर की लोकेशन और मैसेज से संबंधित अन्य तकनीकी जानकारी को शामिल किया जा सकता है।
बिट्टू को इससे पहले भी धमकी मिलने के मामले सामने आ चुके हैं। जून 2022 में भी उन्हें व्हाट्सऐप पर कथित तौर पर धमकी मिली थी और उनके सुरक्षा कर्मचारियों ने इसकी जानकारी दी थी।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता धमकी भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करना और यह पता लगाना है कि मैसेज किस उद्देश्य से भेजा गया था। सुरक्षा एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। धमकी की पुष्टि और आरोपी की पहचान जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
