चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार को पंजाब दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला, आरोप लगाते हुए कि उन्होंने जालंधर में अपने संबोधन के दौरान राजनीतिक टिप्पणियाँ तो कीं, लेकिन महत्वपूर्ण जन मुद्दों से बचते रहे।
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी द्वारा बताए गए राम मंदिर दान विवाद के बारे में प्रधानमंत्री से सवाल किए, और उनसे ईमानदारी पर भाषण देने के बजाय आरोपों का जवाब देने को कहा। पार्टी ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर बार‑बार होने वाली नशीली दवाओं की बरामदगी और केंद्र से पंजाब को लंबित बताए जा रहे फंड की रिहाई पर भी स्पष्टीकरण माँगा।
लंबित केंद्रीय देयों पर सवाल
AAP नेताओं के अनुसार, विभिन्न मदों के तहत पंजाब को केंद्र सरकार से करीब ₹50,000 करोड़ अभी प्राप्त नहीं हुए हैं, जिनमें बाढ़ राहत सहायता और ग्रामीण विकास कोष (RDF) शामिल हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य का दौरा करने के बावजूद प्रधानमंत्री ने इन लंबित भुगतानों के संबंध में कोई घोषणा नहीं की।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य के लोग बकाया देयों के मुद्दे पर स्पष्टता की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री के दौरे के बाद वे निराश रह गए।
नशे पर भाजपा की टिप्पणियों पर जवाब
पंजाब में नशे की समस्या पर प्रधानमंत्री की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP ने कहा कि भाजपा को पहले गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर लगातार हो रही नशीले पदार्थों की बरामदियों के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।
पार्टी का तर्क था कि जाब की आलोचना करने से पहले केंद्र को उस पोर्ट पर पकड़ी गई बड़ी ड्रग खेपों से सवालों का जवाब देना चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि वे देश में कैसे दाखिल हुईं।
‘डबल‑इंजन सरकार’ पर बहस
AAP पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने पंजाब में “डबल‑इंजन सरकार” की प्रधानमंत्री की अपील की भी आलोचना की।
उन्होंने दावा किया कि 2014 से 2017 के बीच, जब भाजपा पंजाब में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा थी और साथ ही केंद्र में भी शासन कर रही थी, उस अवधि में राज्य में नशे के दुरुपयोग और संगठित अपराध में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पन्नू के अनुसार, वर्तमान सरकार की आलोचना करते समय भाजपा उस दौर को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती।
जनीतिक टकराव तेज
ताज़ा टिप्पणियाँ पंजाब में सत्तारूढ़ AAP सरकार और भाजपा‑नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के बीच जारी राजनीतिक टकराव को दर्शाती हैं।
जहाँ प्रधानमंत्री ने अपने दौरे के दौरान विकास पहलों और अवसंरचना परियोजनाओं पर ज़ोर दिया, वहीं AAP का कहना है कि लंबित वित्तीय सहायता, कथित अनियमितताएँ और नशीली दवाओं की तस्करी जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
भाजपा ने AAP के इन ताज़ा आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की है, और आगामी चुनाव अभियान के मद्देनज़र यह राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
