चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में दिल्ली पुलिस के कथित तौर पर दाखिल होने की कड़ी आलोचना की है और पुलिस बल पर सिख धर्मस्थल की धार्मिक मर्यादा की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए मान ने गुरुद्वारे में पुलिसकर्मियों के कथित जबरन प्रवेश की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसके बारे में उन्होंने बताया कि यह घटना बीते दिन घटी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की यह कार्रवाई सिख धार्मिक परंपराओं के प्रति अनादर को दर्शाती है।
मान ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से गुरुद्वारे हमेशा से जरूरतमंदों के लिए शरणस्थली रहे हैं, चाहे उनकी परिस्थितियां कैसी भी हों। मदद मांगने वालों को आश्रय देने की समृद्ध सिख परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि यदि विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले युवा परिसर में दाखिल हुए थे, तो उन्हें संरक्षण दिया जाना चाहिए था।
मुख्यमंत्री के अनुसार, धर्मस्थल पर सेवा करने वाले सेवादारों की जिम्मेदारी शरण में आने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत करने और उसकी सहायता करने के सिद्धांत से जुड़ी होती है।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के आचरण पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी कथित तौर पर सिर ढके बिना और जूते पहनकर धार्मिक परिसर के भीतर दाखिल हुए। उन्होंने इस कथित कृत्य को पवित्र स्थल की गरिमा और स्थापित मर्यादा का खुला उल्लंघन करार दिया।
अपनी आलोचना में तल्ख भाषा का प्रयोग करते हुए मान ने भाजपा पर तालिबानी रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि सिख समुदाय इस घटना को कभी नहीं भूलेगा।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी ने बंगला साहिब में हुई कथित पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिसमें उन्होंने सिख धार्मिक संस्थानों की पवित्रता और शरणस्थली के रूप में उनकी ऐतिहासिक भूमिका के इर्द-गिर्द इस मुद्दे को उठाया है।
ये आरोप और आलोचना भगवंत मान द्वारा अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में व्यक्त किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध बयान में पुलिस के दाखिल होने से जुड़ी परिस्थितियों के विस्तृत विवरण और दिल्ली पुलिस या भाजपा की ओर से किसी भी प्रतिक्रिया का उल्लेख शामिल नहीं है।
