चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): बारिश और पहाड़ों में बढ़ी ठंडक के संयुक्त असर से पंजाब और चंडीगढ़ के मौसम में स्पष्ट बदलाव आया है, जिससे सुबह और शाम के समय ठंडक महसूस की जा रही है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियां अभी सर्दियों के आगमन का संकेत नहीं देती हैं, क्योंकि अक्टूबर आगे बढ़ने के साथ तापमान में फिर से बढ़ोतरी होने की संभावना है।
राज्य का औसत अधिकतम तापमान लगभग 2.1 डिग्री गिरकर सामान्य से करीब 5.1 डिग्री नीचे पहुंच गया है। बठिंडा में सबसे अधिक 31.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया, जबकि चंडीगढ़ में पारा 25.4 डिग्री सेल्सियस रहा। शहर का तापमान सामान्य से करीब 7.2 डिग्री कम दर्ज किया गया, जिससे यह सितंबर का कई वर्षों में सबसे ठंडा दिन साबित हुआ।
पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, रूपनगर, मोहाली और नवांशहर के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं चंडीगढ़ में आंशिक रूप से बादल छाए रहने तथा दिन में एक या दो बार बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं।
हालिया बारिश का असर बिजली की खपत पर भी पड़ा है। तापमान में गिरावट आने से पंजाब में बिजली की मांग काफी घट गई है। 26 सितंबर को दर्ज 12,989 मेगावाट की तुलना में बिजली का लोड घटकर लगभग 8,785 मेगावाट रह गया—यानी महज तीन दिनों में 4,204 मेगावाट की भारी गिरावट आई है।
मांग कम होने से राज्य के बाहर से अतिरिक्त बिजली खरीदने का दबाव भी कम हुआ है। वर्तमान में पंजाब अपने निर्धारित 3,448 मेगावाट ड्रावल के मुकाबले लगभग 3,710 मेगावाट बिजली ले रहा है।
कई जिलों में बारिश दर्ज
28 सितंबर को 10 जिलों में बारिश दर्ज की गई। होशियारपुर में सर्वाधिक 70 मिमी बारिश हुई, जिसके बाद जालंधर में 26.5 मिमी और पटियाला में 19.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। चंडीगढ़ में 9.4 मिमी और मोहाली में 7.5 मिमी पानी बरसा।
पठानकोट में 3.5 मिमी, लुधियाना में 2 मिमी, जबकि कपूरथला, रूपनगर और संगरूर में लगभग 0.5-0.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
मानसून की विदाई करीब
उत्तर-पश्चिमी हवाओं के मजबूत होने से मौसम के शुष्क होने की संभावना है, जिससे वातावरण में नमी घटेगी और व्यापक स्तर पर बादल बनने की संभावना सीमित होगी। हालांकि, छिटपुट बौछारों से इनकार नहीं किया जा सकता।
मानसून की वापसी की प्रक्रिया पहले से ही जारी है और वापसी की रेखा पंजाब व चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है। उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर को प्रभावित करने वाला एक पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है, जिसके जल्द ही आगे बढ़ जाने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून कल तक इस क्षेत्र से पूरी तरह विदा हो सकता है। इसलिए हालिया ठंडक को सर्दियों की शुरुआत के बजाय एक अस्थायी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत ने बताया कि पहाड़ों में हुई बारिश और बर्फबारी के प्रभाव से कुछ समय तक सुबह और शाम का मौसम सुहावना बना रहेगा। अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद दिन के तापमान में फिर से वृद्धि होने की संभावना है, जो लगभग 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है। अक्टूबर के मध्य तक मौसम के धीरे-धीरे सामान्य मौसमी मिजाज में ढलने की उम्मीद है।
