फगवाड़ा (गुरप्रीत सिंह): लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में सोमवार को भी तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना रहा। इससे एक दिन पहले हुए हिंसक प्रदर्शनों के कारण विश्वविद्यालय परिसर के कई हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा था और पास के राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी।
विश्वविद्यालय के बाहर की मुख्य सड़क को आधी रात के बाद यातायात के लिए दोबारा खोला गया, जिससे लगभग 21 घंटे से जारी छात्रों की नाकाबंदी समाप्त हुई। सोमवार सुबह तक, स्थिति को सामान्य करने के प्रशासनिक प्रयासों के बीच परिसर के अंदर और आसपास के कई संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
हिंसा की घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की सफाई का काम शुरू किया। रविवार को उपद्रव के दौरान विश्वविद्यालय के समीप फ्लाईओवर पर फूंके गए पुलिस वाहनों को हटाने के लिए क्रेनों को तैनात किया गया। इसके अलावा, परिसर में जहां-जहां संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था, वहां भी मरम्मत और सफाई अभियान चलाया गया।
एलपीयू प्रशासन ने दावा किया कि उपद्रव के दौरान कुछ नकाबपोश लोग भी मौजूद थे, जो विश्वविद्यालय के छात्र नहीं थे। प्रशासन ने यह आरोप भी लगाया कि इनमें से कुछ लोगों के पास वॉकी-टॉकी उपकरण थे। हालांकि, हिंसा की जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा इन दावों की पुष्टि की जानी बाकी है।
इस अशांति के चलते बड़ी संख्या में छात्रों ने हॉस्टल छोड़ना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के लगभग 40,000 छात्रों में से आधे से अधिक सोमवार सुबह तक ट्रेनों, बसों और निजी टैक्सियों के माध्यम से अपने घरों के लिए रवाना हो चुके थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों से अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित वापस ले जाने के लिए परिसर पहुंचे।
यह पलायन विश्वविद्यालय द्वारा परिसर की शैक्षणिक गतिविधियों को 10 दिनों के लिए निलंबित करने के फैसले के बाद देखा गया। इसके साथ ही, 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली मध्यावधि (मिड-टर्म) परीक्षाओं को भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।
पूरे परिसर में इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं। जहां इस पाबंदी ने छात्रों द्वारा वीडियो साझा करने और ऑनलाइन माध्यमों से लामबंद होने पर रोक लगाई, वहीं इसने रोजमर्रा के कामों को भी बुरी तरह प्रभावित किया। छात्रों ने बताया कि उन्हें यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान करने और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री हासिल करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जम्मू के एक छात्र ने बताया कि अधिकांश छात्र अपने पास नकद पैसे नहीं रखते, और हिंसा के दौरान परिसर के एटीएम में तोड़फोड़ होने के बाद स्थिति और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई।
इस व्यवधान के बावजूद, छात्रों ने बताया कि आवश्यक सेवाएं पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं। सोमवार सुबह परिसर की कैंटीन खुली रहीं, जिससे वहां मौजूद छात्रों को भोजन की सुविधा मिलती रही।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव के विश्वविद्यालय दौरे को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। स्पेशल डीजीपी परवीन सिन्हा और जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगਲਾ भी उनके साथ पहुंचे और उन्हें सप्ताहांत में हुई हिंसा के बाद के घटनाक्रम तथा मौजूदा हालात की जानकारी दी।
विश्वविद्यालय में नियमित कक्षाएं बंद रहने के दौरान, प्रशासन अब शांति व्यवस्था बनाए रखने, नुकसान का आकलन करने तथा बचे हुए छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है।
