चंडीगढ़ में किरायेदारी के नए नियम लागू, मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए बदले नियम

चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): चंडीगढ़ प्रशासन ने संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ किरायेदारी नियम, 2026 अधिसूचित किए

चंडीगढ़ प्रशासन के संपदा विभाग ने संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ किरायेदारी नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों के माध्यम से संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ में विस्तारित असम किरायेदारी अधिनियम, 2021 (2021 का अधिनियम संख्या XXXI) को लागू किया गया है। ये नियम प्रशासक, संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ द्वारा 10 सितंबर, 2026 को अधिसूचित किए गए और पूरे संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ में लागू होंगे।

नई व्यवस्था का उद्देश्य चंडीगढ़ में किरायेदारी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और त्वरित बनाना है। इसमें किरायेदारी समझौतों के पंजीकरण से लेकर किराये में संशोधन, परिसर पर कब्जे की वापसी तथा किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की त्रिस्तरीय व्यवस्था के माध्यम से विवादों के निपटारे तक के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।

नियमों की प्रमुख विशेषताएं

  • किरायेदारी समझौतों की अनिवार्य सूचना: मकान मालिक और किरायेदार को प्रत्येक किरायेदारी समझौते के निष्पादन के दो माह के भीतर संयुक्त रूप से अथवा अलग-अलग ऑनलाइन माध्यम से किराया प्राधिकरण को इसकी सूचना देनी होगी।
  • विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन): सूचना प्राप्त होने पर किराया प्राधिकरण सात दिनों के भीतर पक्षकारों को ई-रसीद के रूप में एक विशिष्ट पहचान संख्या जारी करेगा। यह उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर अथवा ई-मेल पते पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजी जाएगी।
  • स्थानीय भाषा में डिजिटल प्लेटफॉर्म: किराया प्राधिकरण को अपने गठन के तीन माह के भीतर स्थानीय भाषा तथा प्रशासक द्वारा निर्धारित अन्य भाषाओं में एक डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित करना होगा। इसके माध्यम से किरायेदारी से संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे। पंजीकरण के सात दिनों के भीतर किरायेदारी का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा तथा दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन की व्यवस्था होगी।
  • डेटा गोपनीयता के प्रावधान: किरायेदारी से संबंधित सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज पूरी गोपनीयता के साथ सुरक्षित रखे जाएंगे। इन तक केवल संबंधित पक्षकारों और किराया प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारियों की ही पहुंच होगी। ये रिकॉर्ड आम जनता अथवा किसी अनधिकृत व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।
  • किराये एवं अन्य शुल्कों का निर्धारण और संशोधन: मकान मालिक अथवा किरायेदार किराया तथा बिजली, पानी, रखरखाव और सुरक्षा सेवाओं जैसे अन्य शुल्कों के निर्धारण या संशोधन के लिए किराया प्राधिकरण के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। ऐसे आवेदनों पर निर्णय लेते समय प्राधिकरण उसी क्षेत्र में प्रचलित किराये की दरों पर विचार कर सकता है। किराया प्राधिकरण के निर्णय से असंतुष्ट पक्षकार की स्थिति में परिसर के मूल्यांकन के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता नियुक्त किया जा सकता है। इसका शुल्क आवेदक द्वारा वहन किया जाएगा।
  • किराया प्राधिकरण के पास किराया जमा करना: यदि मकान मालिक किराया अथवा अन्य देय राशि स्वीकार करने से इनकार करता है या उसकी रसीद जारी नहीं करता, तो किरायेदार लगातार दो माह तक आरटीजीएस/एनईएफटी, चेक अथवा डिमांड ड्राफ्ट जैसे मान्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान कर सकता है। इसके बाद भी यदि मकान मालिक भुगतान स्वीकार नहीं करता, तो किरायेदार वह राशि किराया प्राधिकरण के पास जमा कर सकता है।
  • परिसर पर कब्जे की वापसी: किरायेदारी समझौते की अवधि के दौरान मकान मालिक अथवा उसकी मृत्यु की स्थिति में उसके कानूनी उत्तराधिकारी आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों सहित किरायेदार से परिसर का कब्जा वापस लेने के लिए किराया न्यायालय में आवेदन कर सकते हैं।
  • ब्याज दर: पक्षकारों के बीच किसी अन्य व्यवस्था पर सहमति न होने की स्थिति में किराये और अन्य शुल्कों की बकाया राशि अथवा सुरक्षा राशि एवं अग्रिम किराये की वापसी पर ब्याज की गणना भारतीय स्टेट बैंक की उच्चतम सीमांत निधि लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) से दो प्रतिशत अधिक दर पर की जाएगी।
  • कानूनी प्रतिनिधित्व: पक्षकार किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय अथवा किराया अधिकरण के समक्ष स्वयं उपस्थित हो सकते हैं या अपनी ओर से प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी अधिकृत प्रतिनिधि अथवा विधि व्यवसायी—अधिवक्ता, वकील या अटॉर्नी—को अधिकृत कर सकते हैं।
  • समयबद्ध विवाद निपटारा:

o किराया प्राधिकरण के समक्ष दायर आवेदन में दूसरे पक्ष को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब देना होगा। कारण दर्ज किए जाने पर यह अवधि अधिकतम 30 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है।

o किराया न्यायालय और किराया अधिकरण के समक्ष दायर अपीलों में अपील के आधार संक्षिप्त तथा क्रमांकित रूप में दिए जाने चाहिए और उनके साथ चुनौती दिए गए आदेश की प्रमाणित प्रति संलग्न होनी चाहिए।

o किराया अधिकरण को नोटिस की तामील के 60 दिनों के भीतर अपील पर निर्णय लेना होगा। सामान्यतः केवल एक स्थगन की अनुमति होगी।

o किराया न्यायालय द्वारा आदेशों का निष्पादन दूसरे पक्ष को नोटिस की तामील के 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना होगा। आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय अधिवक्ताओं अथवा सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति कर सकता है।

उपायुक्त-सह-संपदा अधिकारी श्री निशांत कुमार यादव, आईएएस ने कहा कि नए नियम शहर में मकान मालिकों और किरायेदारों के संबंधों में अधिक सुगमता, पारदर्शिता और निश्चितता लाएंगे। साथ ही, ये नियम विवादों के समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र भी सुनिश्चित करेंगे।

By Gurpreet Singh

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