पंजाब के फरीदकोट जिले में बाढ़ के कारण खेतों में हुए नुकसान को लेकर हालात गंभीर बने हुए हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के स्थानीय विधायक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को तुरंत राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। बाढ़ के पानी से कई गांवों की कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की फसलें भारी नुकसान की चपेट में आ गई हैं।
निरीक्षण के दौरान विधायक ने प्रभावित गांवों के किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने बताया कि लगातार पानी भरने के कारण धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कई खेतों में तो पूरी फसल नष्ट हो चुकी है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने सरकार से मुआवजे और जल्द राहत की मांग की।
विधायक ने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि नुकसान का सही और पारदर्शी सर्वे किया जाए ताकि किसी भी प्रभावित किसान को मुआवजे से वंचित न रहना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जल निकासी की व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि कई क्षेत्रों में पानी की निकासी धीमी होने के कारण खेत लंबे समय से जलभराव की स्थिति में हैं। इसके समाधान के लिए अतिरिक्त पंप सेट लगाए जा रहे हैं और नहरों व नालों की सफाई का काम भी तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों ने दावा किया कि राहत कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
गांवों में बाढ़ के कारण केवल फसलों को ही नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि पशुधन और ग्रामीण ढांचे पर भी असर पड़ा है। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई हो रही है। इसके बावजूद प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें। उनका कहना है कि अगर समय पर मदद नहीं मिली तो आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
इस बीच, राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर नजर बनी हुई है और सरकार का कहना है कि वह हर प्रभावित किसान के साथ खड़ी है। फरीदकोट और आसपास के इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।
