चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह):पंजाब की राजनीतिक माहौल मंगलवार को और तप उठा जब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर चौंकाने वाली भविष्यवाणी की, जबकि कई शहरी केंद्रों में नगर निकाय चुनाव की मतगणना जारी थी।
पिछली शाम एक प्राइवेट मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ बातचीत के दौरान मान ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पठानकोट ज़िले में सिर्फ एक या दो सीटों तक ही सीमित रहेगी, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिकतम नौ सीटों पर जीत सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) कोई भी सीट नहीं जीत पाएगा।
इन टिप्पणियों ने तुरंत राजनीतिक बहस छेड़ दी, जिसमें विपक्षी पार्टियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री पर चल रहे नगर निकाय चुनावों के पहले ही जनमत बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। नगर निकाय चुनावों के परिणाम, जिन्हें अक्सर शहरी पंजाब की राजनीतिक मूड टेस्ट के रूप में देखा जाता है, इस हफ़्ते के अंत तक आने की उम्मीद है।
मान ने नियमित रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) के नगर चुनाव उम्मीदवारों के लिए अभियान नहीं चलाया, लेकिन उनकी सार्वजनिक टिप्पणियाँ पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और AAP को राज्य में प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करने पर केंद्रित दिखीं।
शासक दल शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस और BJP दोनों से बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है, जहाँ शासन, व्यवस्था, नगर बुनियादी ढांचा और बेरोज़गारी जैसे मुद्दे अभियान के दौरान प्रमुख चर्चा का विषय बने हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक़ मान की टिप्पणियों का उद्देश्य बढ़ते विपक्षी जोश को कमजोर करने और शहरों व कस्बों में बढ़ती असंतोष भावना के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वासन देना भी रहा।
कांग्रेस को मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते हुए मान ने उसकी पंजाब राजनीति में लगातार मौजूदगी को स्वीकार किया, जबकि एक समय की प्रमुख क्षेत्रीय ताकत शिरोमणि अकाली दल की वर्तमान भूमिका को बड़े पैमाने पर खारिज कर दिया।
उनकी BJP के सीमित भविष्य को लेकर टिप्पणी इस मान्यता को दर्शाती है कि पार्टी अभी भी पूरे पंजाब में अपना आधार जमाने की कोशिश कर रही है, भले ही आंतरिक ढांचे में सुधार और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से विस्तार की कोशिशें जारी हों।
नगर चुनावों को आने वाले पंजाब चुनावों से पहले मतदाता मूड का संकेतक के रूप में गौर से देखा जा रहा है, जिसके कारण सभी प्रमुख पार्टियाँ इसे राजनीतिक गति की एक महत्वपूर्ण परीक्षा मान रही हैं।
