चंडीगढ़(बलविंदर सिंह): हरियाणा के विशेष ऊर्जा सचिव एवं उत्तर तथा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीएमबीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा के लिए पंचकूला में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
प्रबंध निदेशक ने बैठक के दौरान योजना के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों, स्वीकृत मामलों, रूफटॉप सोलर संयंत्रों की स्थापना तथा लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के कार्यान्वयन में तेजी लाई जाए तथा उपभोक्ताओं को समयबद्ध लाभ सुनिश्चित किया जाए। साथ ही विभिन्न स्तरों पर आ रही समस्याओं के त्वरित समाधान पर भी विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने सभी अधिकारियों एवं वेंडर्स को निर्देश देते हुए कहा कि रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना कार्य में तेजी लाई जाए तथा गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उपभोक्ताओं के आवेदन लंबित न रहें और निर्धारित समयावधि में इंस्टॉलेशन कार्य पूर्ण हो। वेंडर्स के साथ बेहतर समन्वय एवं समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक माह के प्रथम बुधवार को नियमित समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में उपस्थित बैंक अधिकारियों से योजना के अंतर्गत ऋण स्वीकृति एवं वितरण प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाने का आग्रह किया गया, ताकि उपभोक्ताओं को वित्तीय कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। अधिकारियों ने कहा कि बैंकिंग प्रक्रियाओं में तेजी लाकर अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ पहुंचाया जा सकता है।
श्री विक्रम सिंह ने समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न सर्कलों एवं डिवीजनों की प्रगति रिपोर्ट का भी अवलोकन किया गया। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम अपने निर्धारित लक्ष्य 1,22,000 में से 36,130 कनेक्शन जारी कर चुका है, जबकि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम अपने 1,00,000 के लक्ष्य में से 45605 कनेक्शन जारी कर चुका है। इस प्रकार दोनों निगमों द्वारा कुल 81,735 कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।
प्रबंध निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे क्षेत्र स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर योजना के लाभों के बारे में जागरूक करें। इस योजना से उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आएगी तथा स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा से जोड़ना तथा ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
हरियाणा में एसीआर प्रणाली में बड़ा बदलाव
अप्रैल 2027 से बंद होगी मैनुअल एसीआर व्यवस्था
डिजिटल परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग सिस्टम बनेगा
कर्मचारियों की रैंकिंग भी प्रदर्शित होगी
चंडीगढ़, 22 मई-हरियाणा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार अब कर्मचारियों और अधिकारियों के कामकाज की निगरानी डिजिटल तरीके से करेगी। इसके लिए संशोधित एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) फ्रेमवर्क और डिजिटल परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने का फैसला लिया गया है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों एवं निगमों, विश्वविद्यालयों तथा जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं।
जारी निर्देशों के अनुसार अब पारंपरिक एसीआर व्यवस्था को धीरे-धीरे पूरी तरह डिजिटल बनाया जाएगा। विभागवार ऐसे नए एसीआर प्रारूप तैयार किए जाएंगे, जिनमें कर्मचारियों के कार्यों, उपलब्धियों और प्रदर्शन को मापने योग्य तथा परिणाम-आधारित तरीके से दर्ज किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों के प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।
सरकार ने सभी विभागों से उन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मांगी है, जिनके स्तर पर एसीआर सबसे ज्यादा लंबित पड़ी हैं। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य एसीआर की पेंडेंसी को खत्म कर अधिक जवाबदेही और समयबद्ध मूल्यांकन सुनिश्चित करना है।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अप्रैल 2027 से मैनुअल एसीआर प्रणाली पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इसके बाद सभी मूल्यांकन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होंगे। एनआईसी अथवा नामित तकनीकी टीम एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार करेगी, जो कर्मचारियों के कार्य निष्पादन और उपलब्धियों को सीधे एसीआर प्रणाली से जोड़ेगा। यह पूरी व्यवस्था एचआरएमएस पोर्टल से एकीकृत रहेगी। इससे कर्मचारियों के कार्य का वास्तविक समय में आकलन संभव हो सकेगा।
मुख्य सचिव की वेबसाइट पर एक विशेष “ऑनर बोर्ड” विकसित किया जाएगा, जिसमें निर्धारित मानकों के आधार पर कर्मचारियों की प्रदर्शन-आधारित रैंकिंग प्रदर्शित की जाएगी। यह व्यवस्था राज्य, जिला और खंड स्तर तक लागू की जाएगी। इसके तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ कमजोर प्रदर्शन वाले कर्मचारियों की रैंकिंग भी प्रदर्शित होगी।
सरकार का मानना है कि नई डिजिटल एवं प्रदर्शन-आधारित एसीआर प्रणाली से प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा कर्मचारियों में बेहतर कार्य संस्कृति और प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा मिलेगा।
