चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह):ऊर्जा दक्षता को सुदृढ़ करने और संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी वातानुकूलित भवनों में एसी का तापमान 24-25 डिग्री सेल्सियस रखने के संबंध में परामर्श सह दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह पहल इंजीनियरिंग विभाग, यूटी चंडीगढ़ के अंतर्गत ऊर्जा प्रबंधन प्रकोष्ठ (EMC)/स्टेट डिज़िग्नेटेड एजेंसी (SDA) द्वारा की जा रही है, जो शहर में ऊर्जा दक्षता उपायों के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है। यह परामर्श ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 तथा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जारी किया गया है। भवन क्षेत्र भारत की कुल विद्युत खपत का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उपयोग करता है, जिसमें स्पेस कूलिंग की मांग का महत्वपूर्ण योगदान है। इस संदर्भ में प्रशासन ने जिम्मेदार कूलिंग प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
बीईई के अनुमानों के अनुसार, एसी के तापमान में प्रत्येक 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से लगभग 6 प्रतिशत ऊर्जा की बचत संभव है। चूंकि अधिकांश एसी सामान्यतः 20-21 डिग्री सेल्सियस पर चलाए जाते हैं, ऐसे में तापमान को बढ़ाकर 24-25 डिग्री सेल्सियस करने से लगभग 24 प्रतिशत तक बिजली की बचत की जा सकती है, बशर्ते उचित आर्द्रता नियंत्रण और वायु प्रवाह बनाए रखा जाए, जिससे उपयोगकर्ताओं की सुविधा भी प्रभावित न हो।
ये दिशा-निर्देश सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, बोर्डों, निगमों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों तथा हवाई अड्डों, होटलों, शॉपिंग मॉल, कार्यालयों और अन्य बड़े भवनों पर लागू होंगे। कूलिंग सिस्टम के संचालन एवं रखरखाव से जुड़े अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आरामदायक इनडोर परिस्थितियों को बनाए रखते हुए इनका अनुपालन सुनिश्चित करें।
हालांकि, जिन संस्थानों में विशेष तापमान की आवश्यकता होती है, जैसे स्वास्थ्य संस्थान, ऑपरेशन थिएटर, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां तथा डेटा सेंटर, उन्हें इस परामर्श से छूट प्रदान की गई है।
इस पहल के माध्यम से चंडीगढ़ प्रशासन ने ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, बिजली की मांग घटाने और एक अधिक टिकाऊ एवं जलवायु-समर्थ शहरी वातावरण के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है
