पटियाला(गुरप्रीत सिंह): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमेरिकी नागरिकों को धोखा देने और ₹261 करोड़ की संदिग्ध अपराध आय से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर धोखाधड़ी मामले में पटियाला से चार लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी द्वारा स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद आरोपियों को हैदराबाद ले जाया गया।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान हर्षिल नयनभाई रावल, जसवंत सिंह, चेतन मुंजाल और प्रणव पिठाडिया के रूप में हुई है। कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जारी जांच के हिस्से के रूप में उन्हें बुधवार को पटियाला के दो अलग-अलग स्थानों से पकड़ा गया।
ईडी के अनुसार, यह समूह पहले हैदराबाद के माधापुर में एक अवैध कॉल सेंटर चला रहा था। वहाँ पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपियों ने कथित रूप से अपने संचालन को पटियाला स्थानांतरित कर लिया। जांचकर्ताओं ने नेटवर्क की गतिविधियों का पता चंडीगढ़, मोहाली और हैदराबाद तक भी लगाया है।
गिरफ्तारियाँ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 19(1) के तहत की गईं। एजेंसी को संदेह है कि आरोपियों ने अमेरिकी नागरिकों को धोखा देने और फिर अवैध रूप से प्राप्त धन को विभिन्न माध्यमों से भेजने में संलिप्तता की है।
इन गिरफ्तारियों के साथ इस मामले में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या सात हो गई है। इससे पहले ईडी ने 27 जुलाई को विकास निमार, 5 अगस्त को ताराचंद निमार और 10 अक्टूबर को इमरान असगरी को गिरफ्तार किया था।
15 सितंबर को की गई तलाशियों के दौरान एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में चार परिसरों की जांच की। तलाशियों से पटियाला में दो संदिग्ध धोखाधड़ी कॉल सेंटर और पुणे में एक अन्य कॉल सेंटर का पता चला। रिपोर्ट के अनुसार, इन सुविधाओं में लगभग 220 लोग कार्यरत थे।
जांच से पता चला है कि धोखाधड़ी की कथित आय को संपत्तियों, सोने, वाहनों और व्यवसायों सहित कई परिसंपत्तियों में निवेश किया गया। धन का एक हिस्सा चंडीगढ़ के आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट हासिल करने के लिए भी उपयोग किया गया है, ऐसा संदेह है।
ईडी ने अपराध की कुल आय का अनुमान लगभग ₹261 करोड़ लगाया है।
डिजिटल जांच के हिस्से के रूप में एजेंसी ने 79 इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण किया। जांचकर्ताओं ने कॉल सेंटर की बातचीत, वित्तीय रिकॉर्ड, कॉल डेटा, पीड़ितों की जानकारी और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट बरामद किए। पटियाला में तलाशियों के दौरान जाली सरकारी दस्तावेज और नकली पहचान पत्र भी जब्त किए गए।
जांच से यह भी पता चला कि नेटवर्क ने कथित रूप से लगभग 20 लाख अमेरिकी टेलीफोन नंबर हासिल किए, साथ ही व्यक्तियों के नाम, निवासी पते और उम्र जैसी व्यक्तिगत जानकारी भी। निशाना बनाए गए लोगों में अधिक संख्या वृद्ध अमेरिकियों की थी।
एजेंसी के अनुसार, एकत्र की गई जानकारी को जर्मनी और फिनलैंड में स्थित सर्वरों पर संचालित स्वचालित डायलिंग प्रणालियों में डाला गया। इन प्रणालियों का कथित रूप से कॉल और संदेशों के माध्यम से संभावित पीड़ितों से संपर्क करने के लिए उपयोग किया गया।
जांचकर्ताओं ने अब तक 549 पीड़ितों की पहचान की है, जिनमें से कई 1940 के दशक में जन्मे थे। कथित ऑपरेशन में 6,463 अमेरिकी टेलीफोन नंबरों को भी कॉल या संदेश भेजे गए।
ईडी कथित धोखाधड़ी की पूरी सीमा स्थापित करने, शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान करने और संदिग्ध अपराध आय की आवाजाही का पता लगाने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है।
