प्रेम सिंह चंदूमाजरा की अकाली दल में घर वापसी, सुखबीर बादल ने पार्टी में किया शामिल

पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) छोड़ने के दो दिन बाद वरिष्ठ अकाली नेता और पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) में वापसी कर ली। पटियाला स्थित उनके आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कराया और सदस्यता सौंपी। इस दौरान चंदूमाजरा के बेटे और पूर्व विधायक हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा तथा उनके समर्थक भी अकाली दल में शामिल हुए।

प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वह अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले अकाली दल से दूरी बना ली थी और अकाली दल पुनर सुरजीत से जुड़ गए थे। इस संगठन का गठन अगस्त 2025 में शिरोमणि अकाली दल से अलग हुए नेताओं ने किया था। इसकी अगुवाई पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह कर रहे थे।

चंदूमाजरा ने बुधवार को अकाली दल पुनर सुरजीत से अलग होने का ऐलान किया था। उन्होंने इसकी वजह संगठन के नेतृत्व के साथ विचारों, कार्यशैली और रणनीति में मतभेद बताई थी। उनका कहना था कि उन्होंने सभी अकाली और पंथक संगठनों को एक मंच पर लाने की अपील की थी, लेकिन इस मुद्दे पर मिली सार्वजनिक प्रतिक्रिया से उन्हें महसूस हुआ कि दोनों पक्षों की सोच और काम करने के तरीके में तालमेल नहीं है। उन्होंने कहा था कि पंजाब और पंथ के हितों की रक्षा के लिए सभी पंथक संगठनों का एकजुट होना जरूरी है।

पिता के फैसले के अगले दिन उनके बेटे हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने भी अपने समर्थकों के साथ अकाली दल पुनर सुरजीत छोड़ने का ऐलान कर दिया था। हरिंदरपाल सिंह सनौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। उनके साथ पार्टी के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी संगठन से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद दोनों के सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले अकाली दल में लौटने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

शुक्रवार को सुखबीर सिंह बादल स्वयं पटियाला स्थित चंदूमाजरा के आवास पर पहुंचे और उन्हें पार्टी में शामिल कराया। इस मौके पर अकाली दल के अन्य वरिष्ठ नेता और समर्थक भी मौजूद रहे। पार्टी नेतृत्व ने चंदूमाजरा की वापसी का स्वागत किया। इस घटनाक्रम को अकाली दल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अकाली राजनीति में अलग-अलग धड़ों के बीच एकजुटता की कोशिशें जारी हैं।

चंदूमाजरा ने पहले भी पंजाब के अधिकारों, पंथक मुद्दों और क्षेत्रीय हितों को लेकर अपनी राजनीतिक भूमिका पर जोर दिया है। उनकी और उनके बेटे की वापसी से पटियाला तथा मालवा क्षेत्र में अकाली दल की संगठनात्मक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इस वापसी के बाद अकाली दल पुनर सुरजीत से जुड़े अन्य नेता भी पार्टी में लौटते हैं या नहीं।

By Gurpreet Singh

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